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Thursday, 13 October 2011

एक घंटा

देर रात काम खत्म करके जब पिता घर लौटा तो उसका 5 वर्षीय बेटा दरवाजे पर खड़ा इंतजार कर रहा था। उसके घर मंे घुसते ही बेटे ने पूछा -आप एक घंटे में कितना कमा लेते है? अनपेक्षित सवाल खीजकर वह बोला, तुम्हें यह जानने की जरूरत नहीं। बच्चे ने फिर भी जानना चाहा तो उसने कहा, 200 rs। इस पर बच्चे ने पिता से 100 rs देने का आग्रह किया। पिता ने नाराज होकर कहा, ‘यदि तुम कोई खिलौना लेने के लिए या किसी और बेवकूफी के लिए यह रुपए मांग रहे हो तो अपने कमरे में जाओ और सो जाओ।’
बच्चा चुपचाप अपने कमरे में चला गया। करीब एक घंटे के बाद जब पिता का दिमाग शंात हुआ तो उसने सोचा कहीं बेटे को पैसो की वास्तव में आवश्यकता तो नहीं है। उसने बेटे के कमरे में झंाका। उसे जगा पाकर उसके पास बैठ गया और बोला, ‘मैंने तुम पर बहुत गुस्सा किया। तुम 100 rs के बारे में कुछ कह रहे थे।’ बच्चा मुस्कुराया और सीधा बैठ गया। पिता से 100 rs लेकर उसने तकिए के नीचे रख दिए। तभी पिता की नजर वहंॉ पहले से रखे 100 पर पड़ी। बच्चे ने rs गिने और पिता की ओर देखा। पिता दोबारा गुस्सा हो गया ओर बोला, तुम और rs क्यों मांग रहे थे जबकि तुम्हारे पास पहले से ही पैसे हैं। बेटे ने मासूमियत से कहा, क्योंकि मेरे पास पहले पूरे पैसे नहीं थे, अब पूरे हैं। डैडी, अब मेरे पास सचमुच पूरे 200 rs हैं। क्या मैं आपका एक घटंा खरीद सकता हंू ? आप कल घर जल्दी आ जाना। मैं रात का खाना आपके साथ चाहता हूं।‘ पिता के पास बेटे की बात का कोई जवाब नहीं था।

सबसे अनमोल तोहफा अगर आप किसी को देते हो तो वो है वक्त,
क्योकिं जब आप किसी को अपना वक्त देते हो ता,े 
आप उन्हें जिंदगी का वो पल देते हो जो कभी वापस नहीं आता।

अगर किसी को कुछ देना है तो उसे अच्छा वक्त दो,
क्योकिं आप हर चीज वापिस ले सकते हो,
मगर किसी को दिया हुआ अच्छा वक्त वापिस नहीं ले सकते।

Friday, 16 September 2011

Monday, 12 September 2011

क्षमा कर दो

मिली नव मास.गर्माहट गर्भ की..क्षमा कर दो
माँ का दूध ममता का अंचल..क्षमा कर दो
आशीष पिता का वरद हस्त ..क्षमा कर दो
बहना के गुडिया और कपडे..क्षमा कर दो
... भैया को कमी हुई खानदाने में..क्षमा कर दो
पीहर की देहरी पूजी. हुई परायी..क्षमा कर दो
सर से सरकते पल्लू को सम्हाला..क्षमा कर दो
सुखद एहसास दायित्व निर्वाह ..क्षमा कर दो
रिश्तों का समझा मूल्य और दिया मान..क्षमा कर दो
मुखर शैया धृष्ट काया असंतुष्ट नींद ..क्षमा कर दो
संतानों को उचित परवरिश ,दिए संस्कार..क्षमा कर दो
सम्बल बानी सुख दुःख में पी की ..क्षमा कर दो
सामाजिक व्यवहारिक कर्त्तव्य निभाया..क्षमा कर दो
अश्रु छिपे आँखों के अन्दर ढलके ठन्डे आंसू..क्षमा कर दो
वाणी ह्रदय बंद चेहरे पर दिख तो रही हंसी ..क्षमा कर दो
ये है नारी का जीवन अब इस से कम क्या ..क्षमा कर दो
क्षमा कर दो ..क्षमा कर दो ...क्षमा कर दो

Thursday, 18 August 2011

लहर

केसे केसे लोग आने लगे है चिल्लाते चिल्लाते लोग गाने लगे है
बदल दो अब ये तालाब का पानी की ये कमल अब मुरझाने लगे है

Thursday, 2 June 2011

कमाई


वक़्त कुछ ऐसा हमारा चल रहा है
बर्फ में जैसे शिकारा चल रहा है

क्या कमाई है महीने की न पूछो
ये समझ लो बस गुज़ारा चल रहा है
...............
इक चमक चेहरे पे अब भी है हमारे
चाहे गर्दिश में सितारा चल रहा है

जो था नालायक सभी बेटों में, उससे
आज घर का खर्च सारा चल रहा है

Sunday, 29 May 2011

नयी सोच

में ने बाइबल को सरहाया ,कुरान को इज्जत बक्शी फिरे मेरी रामायण पर हाअला क्यों है ?
तुमने युशु की प्राथना की ,राम की पूजा की है ? फिर इतना बेगाना मेरा अल्लह क्यों है ?
तुमने अपने धर्म ग्रंथो में कही पड़ा है मरो - काटो मेरा मजहब भी कहता है इन्सान को मत बाटो?
घर जलने पर हिन्दू -मुस्लिम क्या अलग अलग तरीके से रोते है बेटे के मरने पर क्या एन के असू अलग अलग होते है ?
जब दर्द हमारा एक है ,और अहसास हमारा एक है फिर हमें बाटता क्यों पंडित ,मुल्ला क्यों है ?
क्या मजमूद का कारखाना मोहन के बिना चल सकता है ?
,जमुना के खेत में भी जुम्मन का पसीना भाता है,
रजिया राधिका के संग सावन में झोला करती है

हरिया की ग्या हामिद की बकरी के संग चरति है,, जब बिना एकता नहीं गुजरा ,बहुत जरुरी है भाई चारा फिरे अर्जुन का दुसमन अब्दुला क्यों है ?

तुमने हमको काफ़िर कहा दिया ,हमने तुमको शेतान बोल दिया नफरत की एस रक्त नदी में पगाम्बेर भगवन बह गए
माँ के गर्भा से में जन्मी हु ,तुम क्या कही और से आये हो ? अंत में सब मिलते मिटटी में ,तुम क्या अमृत पी के आया हो ?

आने की जब एक रहा है ,और जाने की भी एक फिर अपना अलग अलग इश्वर अल्लह क्यों है
में ने बाइबल को सरहाया ,कुरान को इज्जत बक्शी फिरे मेरी रामायण पर हाअला क्यों है ? 
तुमने युशु की प्राथना की ,राम की पूजा की है ? फिर इतना बेगाना मेरा अल्लह क्यों है ?


तुमने अपने धर्म ग्रंथो में कही पड़ा है मरो - काटो मेरा मजहब भी कहता है इन्सान को मत बाटो?
घर जलने पर हिन्दू -मुस्लिम क्या अलग अलग तरीके से रोते है बेटे के मरने पर क्या एन के असू अलग अलग होते है ?
जब दर्द हमारा एक है ,और अहसास हमारा एक है फिर हमें बाटता क्यों पंडित ,मुल्ला क्यों है ?

 
क्या मजमूद का कारखाना मोहन के बिना चल सकता है ? 
,जमुना के खेत में भी जुम्मन का पसीना भाता है,


रजिया राधिका के संग सावन में झोला करती है
हरिया की ग्या हामिद की बकरी के संग चरति है





जब बिना एकता नहीं गुजरा ,बहुत जरुरी है भाई चारा फिरे अर्जुन का दुसमन अब्दुला क्यों है ?

तुमने हमको काफ़िर कहा दिया ,हमने तुमको शेतान बोल दिया नफरत की एस रक्त नदी में पगाम्बेर भगवन बह गए
माँ के गर्भा से में जन्मी हु ,तुम क्या कही और से आये हो ? अंत में सब मिलते मिटटी में ,तुम क्या अमृत पी के आया हो ?

आने की जब एक रहा है ,और जाने की भी एक फिर अपना अलग अलग इश्वर अल्लह क्यों है ?

Saturday, 28 May 2011

New age rhyme.


Chattin chattin...
No mamma.
with new grls/boys....
No mamma
telling lies......
No mamma
open ur facebook account...
ha..ha..ha..!

व्यर्थ जीवन

किसी के लिए कभी कुछ नहीं किया,
किसी के आंसू नहीं पोछे, किसी का दुःख नहीं बांटा,
केवल दौड़ता रहा, अपनी चाहतों, अपने सपनो को पूरा करने के लिए,
भागते- भागते पता ही नहीं चला, की कब माथे पर बल पड़ गए,
और शरीर कांपने लगा, लकीरें खिंच आयी थी चेहरे पर,
...आँखें गहरी हो गयीं, और एक शून्य सा पसर गया,
तब लगा एक जीवन व्यर्थ ही बीत गया

नेता और चोर

उस बाग के बेंच पर हम तीन थे - एक तरफ एक बुजुर्ग अखबार पढ़ रहे थे, दूसरी तरफ मैं और हम दोनों के बीच में एक अधेड़। तीनों अजनबी। अचानक बुजुर्ग अखबार पटक कर खड़े हो गए, 'सब साले चोर हैं।' अधेड़ ने एतराज किया,'आपको ऐसा नहीं कहना चाहिए।' बुजुर्ग ने पूछा, 'क्या तुम नेता हो?' अधेड़ बोला, 'नहीं, मैं चोर हूँ।' बुजुर्ग ने 'चोर' से हाथ मिलायाः 'आएम सॉरी, दरअसल मैंने नेताओं के बारे में कहा।'